गुरुग्राम। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को समर्पित भीलवाड़ा सुर संगम 2026 के 2 दिवसीय 13वें संस्करण का राजधानी दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में शानदार आगाज हो गया है। एलएनजे भीलवाड़ा समूह द्वारा आयोजित इस समारोह में शास्त्रीय संगीत प्रेमियों, कलाकारों और संस्कृति के रसिकों की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन से हुई। पंडित केदार बोडस के शिष्य और पंडित राम मराठे की परंपरा से जुड़े युवा कलाकार भाग्येश मराठे ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को शुरुआत से अंत तक जोड़े रखा। कर्नाटक संगीत के डॉ. जयंती कुमारेश ने सरस्वती वीणा वादन प्रस्तुत किया। उनके वादन में अभ्यास, तकनीकी कुशलता और मधुर सुरों का सुंदर मेल था। भाग्येश मराठे ने कहा कि संगीत उनके लिए केवल कला नहीं, बल्कि एक परंपरा है, जिसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाना होता है। डॉ. जयंती कुमारेश ने कहा कि वीणा केवल एक वाद्य नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ध्वनि का स्वरूप है। संगीत में वह शक्ति है, जो मन को शांति प्रदान करते हुए भौतिक और आध्यात्मिक जगत के बीच एक सेतु का काम करती है। एलएनजे भीलवाड़ा समूह के चेयरमैन रवि झुनझुनवाला ने कहा कि ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत का उत्सव मनाना उनके लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीतप्रेमियों के अलावा गणमान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में शामिल हुए।
2 दिवसीय भीलवाड़ा सुर संगम में सुरों की मधुर धुनों से सजी पहली संध्या

