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श्रद्धालुओं ने फुलेरा दौज पर की भगवान श्रीकृष्ण व राधा की आराधना

गुरुग्राम। भारत देश को त्यौहारों का देश कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। वर्ष के 365 दिन में कोई पर्व या त्यौहार सनातन धर्म में होता ही रहता है और लोगों को इन पर्वों की बड़ी ही उत्सुकता रहती है, ताकि वे इन्हें हर्षोल्लास के साथ मना सकें। वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फूलेरा दूज का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व को मंगलवार को श्रद्धालुओं ने बड़ी धूमधाम से मनाया। शहर के विभिन्न मंदिरों में भी फुलेरा दौज की धूम रही। ज्योतिषाचार्यो की कहना है कि मथुरा में इस दिन से होली शुरू हो जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने होली खेलने की शुरुआत की थी। तभी से इस दिन को मथुरा में बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। फुलेरा दूज का महत्व भी बहुत अधिक है। बताया जाता है कि फुलेरा दौज के शुभ मुहूर्त पर कई धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा विवाह शादियों का आयोजन भी किया जाता हैं। गुडगांव मे भी वीरवार को जहां कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, वहीं बड़ी संख्या में शादियां भी कराई गई। श्रद्धालुओं ने अपने घरों व मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण व राधा की विशेष पूजा-अर्चना कर उनसे अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना भी की। पूजा के समय भगवान कृष्ण को गुलाल अर्पित किया जाता है। इस पर्व पर फूलों का खास महत्व होता है। कुछ मंदिरों में श्रद्धालुओं ने फूलों की होली खेली। हालांकि होली के धुलेंडी पर्व पर फूलों की होली खेलने की प्राचीन परंपरा रही है। मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया। सैक्टर 4 स्थित श्रीकृष्ण मंदिर, सैक्टर 9ए स्थित श्री गौरी शंकर मंदिर आदि मंदिरों में भव्य सजावट की गई। श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण की आराधना कर उन्हें श्रृंगार का सामान भी भेंट किया। कहा जाता है कि जिन युवतियों की शादी में कोई बाधा होती है और उनकी शादी समय पर नहीं हो पा रही है तो उन्हें फुलेरा दौज पर भगवान राधा-कृष्ण को श्रृंगार का सामान अवश्य अर्पित करना चाहिए। इस अर्पित किए गए सामान में से कुछ सामान अपने पास भी अवश्य रखें ताकि युवतियों को उनका मनवांछित वर मिल सके और उनकी शादी हो सके।