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व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाती है गीता : हरीश उपाध्याय

गुरुग्राम। गीता जयंती महोत्सव में गीता के महत्व को जीवन जीने की कला सिखाने, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने, और कर्म करने के साथ-साथ फल की चिंता न करने पर जोर दिया गया। इस दिन गीता के उपदेशों को आत्मसात करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन की उलझनों से मुक्ति पाने का संकल्प लिया जाता है। कर्तव्य और कर्म करने के लिए प्रेरित किया जाता है। मनुष्य को अपने अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा और समर्पण के साथ करना चाहिए और फल की चिंता किए बिना कर्म करना चाहिए। उक्त उद्गार आचार्य हरीश उपाध्याय ने श्रीमदभगवद्गीता जयंती के उपलक्ष्य में विश्व जागृति मिशन के संस्थापक आचार्य सुधांशु महाराज की प्रेरणा से सैक्टर 9ए स्थित श्री गौरीशंकर मंदिर परिसर में आयोजित 3 दिवसीय श्री गीता जयंती महोत्सव में संगीतमय शैली में प्रवचन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गीता व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाती है और पारिवारिक, सामाजिक व आध्यात्मिक जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन करती है। गीता के उपदेशों को आत्मसात करके जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास लाया जा सकता है। धर्म और सत्य के मार्ग पर चलना जीवन का एक प्रमुख उद्देश्य है। गीता का नियमित पाठ मुक्ति, मोक्ष, शांति और ज्ञान प्रदान करता है। यह हमारे संदेहों को दूर करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए।