गुरुग्राम।शरीर को स्वस्थ रखने के लिए चिकित्सक जहां लोगों को संतुलित आहार ग्रहण करने का परामर्श देते हैं, वहीं वे विटामिन से भरपूर हरी सब्जियां इस्तेमाल करने का आग्रह भी करते रहे हैं। प्रकृति ने हमें ऐसे खाद्य पदार्थ दिए हैं, जिनके इस्तेमाल से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। फसलों में खरपतवार के रुप में बथुआ भी पैदा हो जाता है, जोकि स्वास्थ्य के लिए बड़ा ही लाभदायक है। उसमें विटामिनों की भरमार है। बथुए को साग-सब्जी ही नहीं, अपितु औषधि भी माना गया है।
सागों का सरदार है बथुआ
डा. मनोज शर्मा का कहना है कि बथुआ सबसे अच्छा आहार है। साग और रायता बना कर बथुआ का अनादि काल से इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन पुस्तक शिल्प शास्त्र में भी उल्लेख है कि अपने घरों को हरा रंग करने के लिए पलस्तर में बथुआ मिलाया जाता था। बथूआ का इस्तेमाल महिलाएं डैंड्रफ से बचाव के लिए भी करती रही हैं। बथुआ गुणों की खान है।
विटामिंस व मिनरल्स से है भरपूर
डा. मनोज का कहना है कि बथुआं विटामिन बी1, बी2, बी3, बी5, बी6, बी9 और सी से भरपूर है तथा बथुए में कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम , सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं। उनका कहना है कि 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं । कुल मिलाकर 43 कैलोरी है।
पौष्टिक आहार है बथुआ
उनका कहना है कि जब बथुआ म_ा, लस्सी या दही में मिला दिया जाता है तो यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बन जाता है। साथ में बाजरे या मक्का की रोटी, मक्खन व गुड की डली हो तो और भी अधिक स्वादिष्ट आहार बन जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए भी है लाभकारी
उनका कहना है कि बथुआ पहलवानों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए अमृत समान है। बथुआ का साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ अमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। निरोग रहने के लिए बथुए का इस्तेमाल एक उत्तम औषधि माना गया है।
नहीं पहचान पा रहे हैं बथुए का गुण
डा. मनोज का कहना है कि इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने-अपने खेतों में रासायनिक जहर डालते हैं और कृषि वैज्ञानिकों ने भी बथुए को खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया है। हम इसके गुणों को नहीं पहचान पा रहे हैं, जो हमारा दुर्भाग्य ही है।
बथुआ साग-सब्जी ही नहीं, अपितु है एक औषधि भी

