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निर्जला एकादशी पर शहर में लगाई गई छबीलें

गुरुग्राम, निर्जला एकादशी के पर्व पर साईबर सिटी में सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं द्वारा सोमवार को मीठे पानी की छबीलें व भण्डारों का आयोजन किया गया। समाजसेवियों द्वारा अग्रसैन चौक स्थित जिला सैनिक बोर्ड के सामने आपका सिटी प्लाजा, न्यू कालोनी व सब्जी मंडी स्थित गुरुद्वारा, गीता भवन, ओल्ड रेलवे रोड स्थित शिवमूर्ति सहित दर्जनों क्षेत्रों में लगाई गई पानी की छबीलों व भण्डारों के दौरान वाहन चालकों को जगह-जगह रोक उन्हें भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए न केवल शीतल मीठा जल पिलाया गया बल्कि आलू, कमल ककड़ी आदि का प्रसाद भी वितरित किया गया। समाजसेवी जतिन गर्ग ,पंकज डावर, प्रवेश शर्मा, अजय, गुलाटी,अशोक सरदाना, अशोक चौहान, दलीप लूथरा आदि ने बताया कि धार्मिक गं्रथों में भी उल्लेख है कि जलदान से बड़ा कोई दान नहीं है। यदि प्यासे व्यक्ति को पानी पिला दिया जाए तो सबसे बड़ा पुण्य का कार्य होता है। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का बड़ा महत्व है। वेदव्यास ने पांडवों को चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प कराया तो महाबली भीम ने निवेदन किया था कि पितामह आपने तो प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं तो एक दिन क्या एक समय भी भोजन के बिना नहीं रह सकता। पितामह ने भीम की समस्या का निदान करते और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि नहीं कुंती नंदन, धर्म की यही तो विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता, सबके योग्य साधन व्रत-नियमों की बड़ी सहज और लचीली व्यवस्था भी उपलब्ध करवाता है। इसलिए तुम ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत करो और तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों का फल प्राप्त होगा। तभी से निर्जला एकादशी का आयोजन किया जाता आ रहा है। इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

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