गुडग़ांव, कोरोना वायरस के प्रकोप से लोगों को बचाने के
लिए लॉकडाउन चल रहा है। आवश्यक सेवाओं में कार्यरत आशा व आंगनवाड़ी
वर्कर्स आदि कोरोना का सामना करने के लिए अपनी जान पर खेलकर स्वास्थ्य
विभाग को सहयोग कर रही हैं। असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक भी
लॉकडाउन पर हैं। हालांकि जिला प्रशासन इन जैसे श्रमिकों व जरुरतमंदों को
लॉकडाउन की अवधि में भोजन व खाद्य सामग्री उपलब्ध कराता आ रहा है, लेकिन
ये श्रमिक आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन व
खाद्य सामग्री नहीं मिल पा रही है। सरकार व जिला प्रशासन का ध्यान
आकर्षित करने व आर्थिक सहायता की मांग को लेकर श्रमिक संगठन सीटू से
संबंधित इन श्रमिकों ने मंगलवार को गुडग़ांव के विभिन्न क्षेत्रों में
खाली बर्तन बजाकर अपने रोष का प्रदर्शन किया। सीटू के जिला महासचिव एसएल
प्रजापति का कहना है कि लॉकडाउन को एक माह हो गया है। असंगठित क्षेत्रों
में कार्यरत दिहाड़ीदार मजदूर घर बैठे हुए हैं। वे भूखे मरने की कगार पर
पहुंच चुके हैं। सरकार व जिला प्रशासन द्वारा जो उन्हें भोजन व राशन
उपलब्ध कराया जा रहा है, वह पर्याप्त नहीं है। प्रवासी श्रमिक भी परेशान
हैं। जनवादी महिला समिति की प्रदेशाध्यक्ष ऊषा सरोहा का कहना है कि इन
श्रमिकों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन्हें 3 माह की खाद्य
सामग्री दी जाए और घर-गृहस्थी का काम चलाने के लिए साढ़े 7 हजार रुपए नगद
राशि का भुगतान भी किया जाए। इस महामारी के दौरान आवश्यक सेवाओं में लगे
कच्चे कर्मचारियों को बीमा कवरेज दिया जाए। गुडग़ांव के विभिन्न क्षेत्रों
में इस प्रकार के आयोजन किए गए। आयोजन को सहयोग देने वालों में
भवन-निर्माण कामगार यूनियन के जिला प्रधान धर्मवीर, परभातीलाल, आशा
वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान मीरा देवी, आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन की
संतोष, सरस्वती, बबीता, मिड डे मील की मूर्ति, गीता, सीमा, रेहड़ी-पटरी
मजदूर यूनियन के योगेश व राजेंद्र सरोहा, जनवादी महिला समिति की भारती
देवी, ज्ञान विज्ञान समिति के जिला संयोजक ईश्वर नास्तिक, नौजवान सभा के
रोहित आदि का सहयोग रहा।

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