गुडग़ांव, डीजल-पेट्रोल व रसोई गैस के बढ़ते दामों से आम
आदमी परेशान होकर रह गया है। हरियाणा में डीजल-पेट्रोल 100 रुपए को पार
करने पर तुला हुआ है, जबकि पड़ोसी प्रदेश राजस्थान में तो पेट्रोल के दाम
108 रुपए को पार कर गए हैं। जो वाहन पड़ोसी प्रदेश में जा रहे हैं, उनके
मालिकों को पेट्रोल के लिए बढ़ी हुई कीमतों पर अपनी जेबें ढीली करनी पड़
रही हैं। राजस्थान के विभिन्न धार्मिक यात्रा पर गए श्यामसुंदर सोनी का
कहना है कि वह अपने साथियों के साथ पौने 2 साल बाद कोरोना महामारी से
बचते-बचाते धार्मिक यात्रा पर गए हैं। गुडगांव से अपने वाहन की टंकी पूरी
कराकर गए थे, लेकिन धार्मिक स्थानों की दूरी एक दूसरे से अधिक होने के
कारण उन्हें अपने वाहन के लिए 108 रुपए से ऊपर का पेट्रोल अपने वाहन में
भरवाना पड़ा है। श्याम सोनी ही नहीं, इन जैसे अन्य लोगों का भी यही कहना
है। उधर डीजल के दाम भी बढ़ते जा रहे हैं, जिससे उद्यमियों व ट्रांसपोर्ट
क्षेत्र में कार्य करने वाले ट्रांसपोटर्स को भी बड़ी समस्याओं का सामना
करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उनके संगठन लंबे समय से प्रदेश सरकार
से मांग करते आ रहे हैं कि डीजल के दामों को नियंत्रित किया जाए।
औद्योगिक क्षेत्रों में माल की ढुलाई भी काफी महंगी हो गई है। उनको
मजबूरी में ही इसमें वृद्धि करनी पड़ी है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि
कोरोना काल में उनकी आर्थिक स्थिति पहले ही बहुत पतली हो चुकी है। ऐसे
में उन्हें कारोबार करना बड़ा मुश्किल हो गया है। ट्रांसपोर्ट संगठन भी
केंद्र व प्रदेश सरकारों से मांग करती आ रही हैं कि डीजल के बढ़ते दामों
को नियंत्रित किया जाए, ताकि ट्रांसपोर्टस की स्थिति थोड़ी ठीक हो सके और
उनका कारोबार भी चल सके, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। डीजल के
दाम बढ़ जाने से दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले वस्तुओं की भी कीमतें
बढ़ गई हैं। गृहणियों का बजट इन सबसे प्रभावित हुआ है। हालांकि रसोई गैस
की बढ़ती कीमतों ने उन्हें पहले से ही परेशान किया हुआ है। उधर उद्यमियों
का भी कहना है कि बिजली की अघोषित कटौती का सामना उन्हें भी करना पड़ रहा
है, जिसके लिए उन्हें जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है और जनरेटर में
डीजल ही इस्तेमाल होता है। डीजल के बढ़ते दामों से उनकी उत्पादन लागत भी
बढ़ गई है, लेकिन उन्हें बढ़ी हुई लागत नहीं मिल पा रही है, जिसका
खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि प्रदेश
सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए जाने वाले टैक्स में कमी कर
उपभोक्ताओं को राहत दे सकती है, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।

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