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केवल 100 मीटर से अधिक ऊँचाई वाली पहाडिय़ों को ही अरावली मानने वाले निर्णय को वापिस ले सरकार : संतोख सिंह

गुरुग्राम।अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष व जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही पूरे अरावली क्षेत्र में सतत खनन प्रबंधन योजना लागू होने तक नए खनन पट्टों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद केंद्र सरकार किरकिरी से बचने के लिए नए-नए निर्देश जारी कर केवल दिखावटी कदम उठा रही है। उन्होंने हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा दिल्ली से गुजरात तक फैली अरावली रेंज में नए खनन पट्टों के आवंटन पर पूर्ण प्रतिबंध के निर्देशों को पहले से मौजूद न्यायिक आदेशों की ही पुनरावृत्ति बताया। उनका कहना है कि सरकार व अवैध खनन माफियाओं के कारण अरावली क्षेत्र में अनियमित और अवैध खनन लगातार जारी है। इसके दुष्परिणामस्वरूप हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक की हवा जहरीली होती जा रही है और पूरा क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ रहा है। एक ओर भाजपा सरकार अरावली को मरुस्थलीकरण रोकने, जैव विविधता संरक्षण, जलभंडारों के पुनर्भरण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए आवश्यक बताती है, वहीं दूसरी ओर ऐसी नीतियाँ अपनाई जा रही हैं जो अरावली के अस्तित्व के लिए घातक हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि केवल 100 मीटर से अधिक ऊँचाई वाली पहाडिय़ों को ही अरावली मानने वाले निर्णय को वापिस लिया जाए, अरावली क्षेत्र की वैज्ञानिक और पारिस्थितिक परिभाषा को पुन: लागू किया जाए और अवैध खनन में संलिप्त माफिया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।