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ओम शांति रिट्रीट सेंटर में शिक्षाविदें के राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ

गुरुग्राम। ब्रह्माकुमारीज के बोहड़ाकलां स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में शिक्षाविदों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के शिक्षा प्रभाग द्वारा अवेकनेड एजुकेटर्स इनलाइटेन्ड जेनरेशन विषय पर हुआ।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीइ) के निदेशक डॉ. अमित दत्ता ने कहा कि देह भाव के कारण मनुष्य का ध्येय छोटा हो गया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षा के माध्यम से सामाजिक कार्य होते थे, लेकिन सामाजिक ताना-बाना बिखरने से शिक्षा का प्रभाव कम हो गया। डॉ. दत्ता ने कहा कि शिक्षक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन आज ऐसे लगता है कि गुरु का गुरुत्व खो सा गया है। आवश्यकता है, उस गुरुत्व को वापस लाने की। शिक्षक के अंदर करुणा का भाव जरूरी है।गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति संजय कौशिक ने कहा कि एक स्वस्थ शरीर के लिए मन का स्वस्थ होना जरूरी है। आज डिप्रेशन सबसे बड़ी बीमारी बनकर उभरा है। जिसका प्रमुख कारण शिक्षा में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का अभाव है। एक आदर्श शिक्षक कई पीढिय़ों का सुधार कर सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में आध्यात्मिक मूल्यों पर जोर दिया जाना एक अतुलनीय कार्य है। ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने बतौर प्रमुख वक्ता अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मनुष्य सब कुछ सीख चुका है। लेकिन मनुष्य-मनुष्य की तरह रहना भूल गया है। आध्यात्मिकता हमें जागरूक करती है। एक अच्छे शिक्षक के अंदर अच्छे विद्यार्थी का होना जरूरी है। जागरुकता हमें स्वयं से जोड़ती है। जागरूकता हमें रचनात्मक बनाती है।
संस्थान के दिल्ली, हरीनगर से संबंधित सेवा केंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी शुक्ला दीदी ने कहा कि शिक्षक का जीवन सबको प्रेरणा देता है। शिक्षक समाज को नई दिशा प्रदान करता है। शिक्षा मानव को संतुलित जीवन जीने की राह देती है। उन्होंने कहा कि जागरूक शिक्षक वो है जिसके जीवन में मूल्यों का समावेश है। शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। शिक्षक को चरित्र निर्माता भी कहा जाता है।