गुडग़ांव, प्रदेश के निजी स्कूलों को सूचना के अधिकार
(आरटीआई) से बाहर करने से अभिभावक बड़े परेशान दिखाई दे रहे हैं। गत
सप्ताह पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों की एक याचिका पर
सुनवाई करते हुए फैसला लिया था कि निजी स्कूलों से सूचना के अधिकार के
तहत जानकारी नहीं मांगी जा सकती। फैसले में यह भी कहा गया है कि यदि
शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की कोई जानकारी अपने पास रखता है तो शिक्षा
विभाग उस जानकारी को अन्य के साथ साझा नहीं कर सकता। अभिभावक संघ के
हिमांशु शर्मा का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक पहले ही
परेशान थे। अब उच्च न्यायालय द्वारा उनके पक्ष में फैसला आ गया है तो
उनकी मनमानी और अधिक बढ़ जाएगी, जिससे अभिभावक व छात्र प्रभावित होंगे।
हालांकि उच्च न्यायालय के आदेश का अभिभावक संघ पूरा सम्मान करता है।
गौरतलब है कि हरियाणा प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट हिसार की ओर से उच्च
न्यायालय में याचिका दायर कर प्रदेश सरकार के उस आदेश को रद्द करने की
मांग की गई थी, जिसमें सरकार ने निजी स्कूलों को सूचना के अधिकार के तहत
जानकारी देने का आदेश दिया था। निजी स्कूलों ने उच्च न्यायालय में दलील
थी कि वे सेल्फ फाइनेंस स्कूल हैं, इसलिए सूचना के अधिकार के तहत उनके
बच्चों व शिक्षकों की जानकारी तीसरे पक्ष को नहीं दी जा सकती, जिस पर
उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया। लॉकडाउन अवधि के दौरान अभिभावक
निजी स्कूलों पर आरटीआई के तहत आय से संबंधित जानकारी देने की मांग कर
रहे थे। अदालत के इस फैसले से अब शिक्षा विभाग आरटीआई की आड़ में निजी
स्कूलों पर दबाव नहीं बना पाएगा।

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