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अरावली पर्वत श्रृंखला को 100 मीटर ऊँचाई के मानदंड तक सीमित करना है गलत : संतोख सिंह

गुरुग्राम। अरावली पर्वत श्रृंखला को केवल 100 मीटर ऊँचाई के मानदंड तक सीमित करने के प्रस्ताव के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों के पर्यावरणप्रेमियों में रोष गहराता जा रहा है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में जहां प्रदर्शन किए जा रहे हैं, वहीं अन्य क्षेत्रों के लोग भी अब इस प्रस्ताव के विरोध में खड़े हो गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने इस प्रस्ताव पर गहरी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन और संवेदनशील प्राकृतिक प्रणालियों में से एक है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई है। यह जल संरक्षण, जलवायु संतुलन, जैव-विविधता की रक्षा तथा मानव जीवन की सुरक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अरावली केवल ऊँचे पहाड़ों तक सीमित नहीं है, अपितु यह एक सतत जियोलॉजिकल और इकोलॉजिकल सिस्टम है, जिसमें छोटी पहाडिय़ाँ, वन क्षेत्र, जलस्रोत, भूजल रिचार्ज ज़ोन और वन्यजीव कॉरिडोर शामिल हैं। केवल ऊँचाई के आधार पर इसकी परिभाषा तय करना इसके वास्तविक स्वरूप और कार्यों की अनदेखी है। उनका कहना है कि नई संकीर्ण व्याख्या से खनन, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, जिसके परिणामस्वरूप जल संकट, प्रदूषण, मरुस्थलीकरण और जैव-विविधता को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि अरावली पर्वत श्रृंखला को केवल 100 मीटर ऊँचाई आधारित परिभाषा में सीमित करने के प्रस्ताव को तत्काल अस्वीकार किया जाए और इसकी समग्र, वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिक पहचान को यथावत बनाए रखा जाए।