गुरुग्राम। अरावली पर्वतमाला के मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान लेने तथा 100 मीटर ऊँचाई आधारित आदेश पर रोक लगाए जाने के निर्णय का संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष व जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान संतोख सिंह ने स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण, जनहित और सच्चाई की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय न केवल अरावली के सतत पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की ओर संकेत करता है, अपितु आने वाली पीढिय़ों के लिए देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर को बचाने की न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह स्पष्ट संदेश देता है कि पहाड़ केवल भौगोलिक संरचनाएं नहीं, अपितु जीवित इकोसिस्टम हैं, जिन्हें खनन या रियल एस्टेट हितों के लिए मनमाने ढंग से पुनर्परिभाषित नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कहा कि सरकार के लिए संकेत बिल्कुल स्पष्ट है कि अरावली जैसी प्राचीन पर्वतमालाओं को किसी भी कीमत पर व्यावसायिक हितों की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता। गलत नीतिगत निर्णय न केवल पर्यावरणीय असंतुलन पैदा करेंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र को रेगिस्तानीकरण की ओर धकेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली को बचाने की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से जवाबदेही, इकोलॉजिकल प्रोटेक्शन और पर्यावरणीय न्याय अब नीति-निर्माण और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं।
अरावली पर्वतमाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: लिया संज्ञान है स्वागत योग्य : संतोख सिंह

