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सडक़ के गहरे गड्ढे बने शहर की जर्जर व्यवस्था के प्रतीक

गुरुग्राम। देश के साइबर सिटी और कॉर्पोरेट हब के रूप में विख्यात गुरुग्राम में बुनियादी सुविधाओं की पोल शहर की जर्जर व्यवस्थाएं ही खोलती रहती हैं। सेक्टर 12 स्थित चौपाल होटल के पास सडक़ के बीचों-बीच बने एक खतरनाक और गहरे गड्ढे ने स्थानीय जनता और वाहन चालकों की मुसीबतों को बढ़ा दिया है। इस बदहाल स्थिति की ओर जिला प्रशासन और नगर निगम का ध्यान आकर्षित करने के लिए जनता ने अब अनोखा और व्यंग्यात्मक तरीका अपनाया है। सडक़ पर बने इस बड़े गड्ढे के कारण रोजाना भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि वाहन चालकों और आम जनता को इस गड्ढे से बचकर अपनी जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने इस जानलेवा गड्ढे के बीचों-बीच एक झंडा गाडक़र प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा कटाक्ष किया है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग समय पर सडक़ों की मरम्मत कराने में असमर्थ हैं, तो कम से कम उस गड्ढे के पास आधिकारिक तौर पर निगम का झंडा लगा देना चाहिए ताकि दूर से ही लोगों को खतरे का संकेत मिल सके। सामाजिक संस्था स्वास्तिक फाउण्डेशन के संस्थापक अध्यक्ष राज सैनी बिसरवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए), नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) और मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे आए दिन दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और बड़े हादसों का खतरा बना रहता है। उनका मानना है कि मिलेनियम सिटी कहे जाने वाले इस शहर में सडक़ों की ऐसी जर्जर हालत विकास के दावों की पोल खोलती है। जनता और वाहन चालकों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि कागजी कार्रवाई या बयानबाजी की बजाय तुरंत प्रभाव से इन गड्ढों को भरवाया जाए और मुख्य मार्गों की विशेष मरम्मत सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी अनहोनी दुर्घटना को समय रहते टाला जा सके।