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महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा 11 को माह का सबसे ज्यादा अंधकारपूर्ण दिवस है महाशिवरात्रि

गुरुग्राम, भारत को पर्वों के देश के रुप में जाना जाता
है। ऐसा कोई दिन नहीं होगा, जिसमें कोई न कोई पर्व का आयोजन न होता हो।
ऐतिहासिक घटनाओं, विजयश्री तथा जीवन की कुछ अवस्थाओं जैसे फसल की बुवाई,
रोपाई और कटाई आदि को भी पर्वों से जोड़ दिया गया है। पर्वों के ही क्रम
महाशिवरात्रि पर्व का भी बड़ा महत्व है और इसे धूमधाम से भी मनाया जाता
है। इस वर्ष यह पर्व आगामी 11 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए
शहरी क्षेत्र के ही नहीं, अपितु ग्रामीण क्षेत्रों स्थित मंदिरों,
शिवालयों व आश्रमों में तैयारियां जोरोशोरों से चल रही हैं।
क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?
बालयोगी अलखनाथ ओघड़ का कहना है कि हर चंद्र मास का 14वां दिन अथवा
अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। यह पर्व
हर वर्ष फरवरी या मार्च माह में आता है। यह एक ऐसा दिन है, जब प्रकृति
मनुष्य को उसके आद्यात्मिक शिखर तक ले जाने में मदद करती है। इस समय का
उपयोग करने के लिए यह पर्व ही एक ऐसा पर्व है जो पूरी रात चलता है।
महाशिवरात्रि का महत्व
बालयोगी अलखनाथ ओघड़ का कहना है कि महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने
वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण
है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में
मग्न हैं। महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह भी मनाया जाता
है। साधकों के लिए यह वह दिन है, जिस दिन भगवान शिव कैलाश पर्व के साथ
एकात्म हो गए थे। उनका कहना है कि यौगिक परंपरा में भगवान शिव को किसी
देवता की तरह नहीं पूजा जाता, उन्हें आदि गुरु माना गया है। यह पहले
गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा है। धार्मिक ग्रंथों में भी उल्लेख है कि ध्यान
की अनेक सहस्राब्दियों के बाद एक दिन भगवान शिव पूर्ण रूप से स्थिर हो
गए, वही दिन महाशिवरात्रि का था। तभी से महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से
मनाया जाता है।
सबसे अंधकारपूर्ण दिवस है महाशिवरात्रि
बालयोगी अलखनाथ ओघड़ का कहना है कि शिवरात्रि माह का सबसे अंधकारपूर्ण
दिवस होता है। शिव का शाब्दिक अर्थ यही है कि जो नहीं है, जो है वह
अस्तित्व व सृजन है, जो नहीं है वह शिव है। उनका कहना है कि आधुनिक
विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि सब कुछ शून्य से ही उपजा है और शून्य
में ही विलीन हो जाता है। शिव यानि विशाल रिक्तता या शून्यता को ही
महादेव के रूप में जाना जाता है।
आद्यात्मिक महत्व भी है महाशिवरात्रि का
महाशिवरात्रि का आद्यात्मिक महत्व भी है। आद्यात्मिक साधक के लिए बहुत सी
संभावनाएं इस पर्व में मौजूद हैं। प्रत्येक योगी के लिए शिवरात्रि
महत्वपूर्ण है। योगी वह व्यक्ति है, जिसने अस्तित्व की एकात्मकता को जान
लिया है। एकात्म भाव को जानने की सारी चाह योग है। महाशिवरात्रि की रात
योगी को इसी का अनुभव कराती है।

Comments (3)

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