NCRNewsअध्यात्मअर्थव्यवस्थादेशबिज़नेसराज्य

भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन 28 अगस्त को

गुरुग्राम। भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस बार 28 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों की दुकानें सज चुकी हैं और बहनों ने अपने भाइयों के लिए खरीदारी शुरू कर दी है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रहा है। शतभिषा नक्षत्र और ग्रहों के विशेष संयोग के कारण यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की प्रात: 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त को प्रात: 9 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। राखी बांधने का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त 28 अगस्त को प्रात: 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
सदर बाजार में लगी खरीददारों की भीड़
शहर के सदर बाजार सहित अन्य क्षेत्रों में खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। त्यौहार की तैयारियों को लेकर बाजारों में दिन भर चहल-पहल बनी रही और ग्राहकों, विशेषकर महिलाओं और युवतियों का तांता लगा रहा। सदर बाजार के साथ-साथ क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियों की दुकानें सजी हुई हैं। बहनों द्वारा अपने भाइयों की कलाई के लिए फैंसी, रेशमी, मोतियों तथा बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली राखियों की जमकर खरीदारी की जा रही है। राखियों के अलावा मिठाई की दुकानों, कपड़ों के शोरूम और उपहारों की दुकानों पर भी खासी भीड़ देखने को मिल रही है। व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष बाजार में काफी सकारात्मक उत्साह देखा जा रहा है और त्यौहार से ठीक पहले खरीदारी अपने चरम पर पहुँच गई है। चारों तरफ त्यौहार की रौनक और उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।
पौराणिक व ऐतिहासिक ग्रंथों में उल्लेख
भविष्य पुराण के अनुसार, देव-दानव युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए इंद्राणी ने मंत्रपूत रक्षासूत्र भगवान इंद्र की कलाई पर बांधा था। महाभारत में भी श्रीकृष्ण की उंगली कटने पर द्रौपदी द्वारा अपनी साड़ी का आंचल बांधने और श्रीकृष्ण द्वारा चीरहरण के समय रक्षा करने का प्रसंग प्रसिद्ध है। वहीं, ऐतिहासिक दृष्टि से मेवाड़ की रानी कर्मावती द्वारा हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा की गुहार लगाने की कथा आज भी भाई-बहन के कर्तव्य की मिसाल है।
स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य व सिनेमा में योगदान
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में रवींद्रनाथ टैगोर ने बंग-भंग आंदोलन के दौरान रक्षाबंधन को सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ जनजागरण का माध्यम बनाया था। इसके अलावा, साहित्यिक नाटकों और भारतीय सिनेमा के अमर गीतों ने भी इस पर्व की महत्ता को जन-जन तक पहुँचाया है। डिजिटल युग में ई-कॉमर्स साइटों और आधुनिक माध्यमों ने सात समंदर पार बैठे भाइयों तक भी राखियाँ और स्नेह पहुँचाना आसान बना दिया है।