गुरुग्राम। गंगा दशहरा का पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व ज्येष्ठ अधिक मास में आगामी 25 मई को मनाया जाएगा। पडित राजनाथ शास्त्री ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि आरंभ 25 मई की प्रात: 4 बजक 30 मिनट पर होगा, जिसका समापन अगले दिन यानि कि 26 मई की प्रात: 5 बजकर 10 मिनट पर होगा। इसलिए उदयातिथि के अनुसार गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाएगा। इस दिन हरिद्वार, वाराणसी, ऋषिकेश और प्रयागराज जैसे तीर्थ स्थलों पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। यदि गंगा तट पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जाता है। शाम के समय गंगा घाटों पर भव्य गंगा आरती की जाती है और नदियों में दीप प्रवाहित (दीपदान) किए जाते हैं, जो देखने में अत्यंत अलौकिक लगता है। इस पर्व में मां गंगा को 10 प्रकार के फूल, 10 दीपक, 10 फल और 10 तरह के नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा है। दान करते समय भी 10 ब्राह्मणों को या 10 प्रकार की वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है।
क्या है मान्यताएं
पडित राजनाथ शास्त्री कहना है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राजा भगीरथ कठोर तप के बाद गंगा नदी को धरती पर जाए थे। लेकिन इनका वेग इतना शक्तिशाली था कि इससे समस्त पृथ्वी नष्ट हो जाती। इसलिए इन्हें सबसे पहले विषधर शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया। इसके बाद उन्होंने ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपनी जटाओं से धरती पर प्रवाहित किया।
पौराणिक कथा और महत्व
उनका कहना है कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी। इसलिए गंगा का वेग अत्यधिक तीव्र था जिससे पृथ्वी नष्ट हो सकती थी, इसलिए भगवान शिव ने गंगा के वेग को नियंत्रित करने के लिए उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया। इसके बाद गंगा जी पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं और भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार किया। इसी कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है।
गंगा दशहरा का पर्व 25 को, तीर्थ स्थलों पर गंगा स्नान का है विशेष महत्व -पडित राजनाथ शास्त्री

