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एआईडीवाईओ ने महापंचायत कर उठाई बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी समस्याओं को लेकर आवाज

गुरुग्राम। शिक्षा की अलख जगाने वाले समाजसुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर शनिवार को ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ आर्गेनाईजेशन (एआईडीवाईओ) द्वारा देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर युवा महापंचायत का आयोजन संगठन के दिनेश मोहंता की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगठन से जुड़े युवा, सदस्य व पदाधिकारी शामिल हुए। प्रांतीय संयोजक बलवान सिंह ने कहा कि महापंचायत में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी समस्याओं को लेकर आवाज उठाई गई। सरकार की शिक्षा नीति पर भी सवाल उठाए गए। जेएनयू के प्रो. अतुल सूद ने कहा कि एक ओर सरकारें रोजग़ार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ रही है वहीं दूसरी ओर शिक्षा नीतियों के माध्यम से, छोटी उम्र से ही छात्रों, युवाओं में सवाल करने की प्रवृत्ति को ही खत्म कर रही है। श्रमिकों के जनवादी अधिकारों का लगातार हनन किया जा रहा है, हाल में आए लेबर कोड इसका ज्वलंत उदाहरण है। प्रो. नंदिता नारायण ने कहा कि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद पड़े हैं, देश भर में लाखों लाख पद खाली हैं, उन्हें भरा नहीं जा रहा है। निजीकरण के इस दौर में स्थाई नौकरी का स्थान पूरी तरह कॉन्ट्रैक्चुएलिजेशन की प्रक्रिया ले चुकी है। अमरजीत कुमार ने कहा कि बेरोजगारी आज केवल एक आंकड़ा नहीं, अपितु मानवीय त्रासदी बन चुकी है। निजीकरण और ठेकेदारी प्रथा ने सुरक्षित रोजगार की अवधारणा को ही खत्म कर दिया है। सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी और रोजगार को नीति के केंद्र में लाना होगा। युवाओं को धर्म और जाति के नाम पर भटकाने की साजिश हो रही है ताकि वे अपने वास्तविक मुद्दों—रोटी, कपड़ा और रोजगार—पर बात न कर सकें। महापंचायत में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें देश की वर्तमान सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।